कोरोना से जान बचा रहा डिजिटल अस्पताल, आइसोलेशन में मरीजों को ऐसे मिल रहा इलाज

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कोरोना संक्रमित की जान बचाने के लिए शहर में 52 डिजिटल अस्पताल चल रहे हैं। यह अस्पताल बकायदे सरकारी डॉक्टर संचालित कर रहे हैं। व्हाट्सएप ग्रुप पर चल रहे इन अस्पतालों के जरिए डॉक्टर संक्रमितों की सेहत पर नजर रख रहे हैं और जरूरत के मुताबिक उन्हें परामर्श दे रहे हैं।

दरअसल, जिले में कोरोना संक्रमण का ग्राफ जुलाई के मध्य से तेजी से बढ़ा। औसतन 200 मरीज रोजाना सामने आ रहे हैं। जिले में संक्रमितों की संख्या 6500 के करीब है। इनमें शहर में करीब 4300 संक्रमित हैं। इनमें 90 फीसदी होम आइसोलेशन में हैं। होम आइसोलेशन में रह रहे संक्रमितों की सेहत पर नियमित नजर रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने डिजिटल तकनीक का सहारा लिया।

अर्बन पीएचसी के प्रभारियों ने बनाया व्हाट्सएप ग्रुप 
शहर के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद 23 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों ने अपने-अपने क्षेत्र के संक्रमित की निगरानी के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाए। हर प्रभारी ने औसतन दो-दो ग्रुप बनाएं हैं। शाहपुर, गोरखनाथ, तिवारीपुर, बसंतपुर, सिविल लाइंस, बेतियाहाता क्षेत्र में संक्रमितों की संख्या अधिक होने पर प्रभारियों को तीन-तीन ग्रुप बनाने पड़े।

कारगर साबित हुए ग्रुप 
हर ग्रुप में पीएचसी से जुड़े डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टॉफ, एएनएम, आशा व क्षेत्र से जुड़े संक्रमित शामिल हैं। ग्रुप पर लक्षण वाले संक्रमित रोजाना सुबह व शाम को बुखार, गले में खराश, सर्दी-जुकाम व ऑक्सीजन लेवल की जानकारी देते हैं। जबकि बिना लक्षण वाले संक्रमित बीपी, पल्स रेट और शुगर लेवल की जानकारी ग्रुप में रोज अपडेट करते हैं।

डॉक्टर देते हैं सलाह 
ग्रुप के एडमिन डॉक्टर जरूरत पड़ने पर मरीजों को आवश्यक सलाह देते हैं। जिन मरीजों तक दवाएं नहीं पहुंची हैं, उन्हें दवा भी मुहैया करायी जाती है। अगर मरीज की तबीयत बिगड़ती है तो डॉक्टर उसे आवश्यक दवाओं की सलाह देते हैं। तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर भर्ती कराने का भी इंतजाम डॉक्टर करते हैं।

एक-दूसरे का मनोबल बढ़ा रहे संक्रमित 
ये व्हाट्सएप ग्रुप क्षेत्र के आधार पर बने है। ग्रुप में कुछ सदस्य एक-दूसरे के पूर्व परिचित निकल रहे हैं। ऐसे सदस्य एक-दूसरे का मनोबल भी बढ़ा रहे हैं। इससे संक्रमितों की सेहत में तेजी से सुधार आ रहा है। संक्रमितों के सकारात्मक व्यवहार से स्वास्थ्य विभाग का भी काम सहज हो जा रहा है।

व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर मरीजों की निगरानी का प्रयोग बेहद कारगर है। इसके जरिए हम सभी संक्रमितों के नियमित संपर्क में हैं। रोज नए सदस्य इसमें जुड़ रहे हैं। जो सदस्य निगेटिव हो जा रहे हैं उन्हें हटाया भी जा रहा है।

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